Tuesday, 17 December 2013

एक वक़्त

अपनी भी  दोस्ती ,कुछ रोज ज़माने से रही ।
जिंदगी ने  देखा तबाही का  मंजर ,वो भी अब  आजमाने से रही ।


वो भी दिन  थे  ,जब  तूफाँ से टकराये  थे ।
बिखरे टूटे है ,पर अब हवा भी  उड़ाने से  रही ।


एक  वक़्त  था ,जब  उनसे  मोह्बत  थी ।
अब भी  है ,पर  अब समां  चिराग जलाने  से  रही ।


माँ  ने  ताकीद  की  थी ।
बहुत हुआ बेटा ,पर अब  वो भी जगाने  से रही । 

वो तुम थी

क्या तारीफ़  करे
तुम्हारी
लफ्ज  ही  नहीं
मिलते कही ।
खूबसूरत  सी  शाम हो
तुम
ये  बात है  सही ।
खिली खिली
धूप  सी
वादियो
ने भी कही ।
वो सांवली
अनसुनी अनकही
तुम हो
वही
जो ख्वाबो
में थी कही । 

Saturday, 2 November 2013

इधर से , उधर से



  तुम्हारा दिल भी  सागर  सा  गहरा  होता
  काश तुमने  भी  बूंदो  को संजोया होता ! 


  कुछ तो  बोल  ,ये  खामोशी अच्छी  नहीं  लगती
  जाने क्यों तेरे  ,आखों  की कहानी  सच्ची नहीं  लगती !


  शहर भर में  ये बदनाम  है
  तेरी आखो का  हुनर मुझे मालूम है !

इक ख्वाब

  एक  दिन
  सुबह हो 

  और वो चाय लिये
  सिरहाने आ जाये !

  एक दिन
  छत पर पड़ोस कि
  वो सांवली   सी  लड़की 

  बिना बात  के  मुस्का  जाये !

  एक दिन
  पड़ोस कि  ऑंटी
  उस लड़की  से
  हमारी बहुत  सी  तारीफ कर जाये !

  एक दिन
  वो कॉलेज  में
  हमसे हाई  हेलो  कर  जाये !

  एक दिन
  वो हमें  देख  के
  थोडा सा  शर्र्मा  जाये !

  एक दिन
  वो अकेली  हो
  छाता एक  हो ,और  झम्  झम्  बारिश  हो जाये !

  एक वो  दिन
  भी आ  जाये
  जब वो  बिना  बात के  लड़  जाये !

  एक दिन
  दूर जाने  कि  बात कहने  पर
  वो होंठो  पर धीरे  से  हाथ  धर  जाये !

  एक दिन  वो
  ख्वाबो में  आये
  आँखे खुले
  तो ये  सब  सच  हो  जाये !

Friday, 1 November 2013

यादें

एक  अरसे  बाद
धूप  खिली  थी
चेहरे  पर !
धुधली  यादें  थी
अब  तक
पहरे पर !
वो एक  उलझन  है !
मम्मी के
उन के धागे
सी  उलझी  हुई !
वो अल्हड़ 
हवा में झूमते
पीपल के
पीले पत्ते  सी !
वो मीठी  है
मुह में
शक्कर  की
डली  सी !
वो
गहरी  है
समन्दर  कि  सी !
वो जेठ  की
दोपहर मे
ठंडी हवा
कि  सी !
वो अँधेरे  में
दिये सी !
वो  बच्चे  के
चेहरे कि हसी  सी !
वो अकेलेपन  में
कांधे सी !
वो 
बिलकुल  पगली
पगली सी !